सूर्य का आर्द्रा नक्षत्र में हो रहा है प्रवेश अब बदल जायेगा वर्षा का प्रभाव

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वर्षा कारक नक्षत्र और ग्रह आर्द्रा में भगवान भुवन भास्‍कर सूर्य 22 जून 2018 को प्रात काल 11 बज कर 23 मिनट पर प्रवेश करेंगे। इसी आधार पर देश में वर्षा के प्रभाव और स्‍वरूप का आंकलन किया जायेगा। ज्‍योतिष शास्‍त्र और अन्‍य शास्‍त्रों के अनुसार जैसे ही सूर्य आर्द्रा में प्रवेश करेंगे वर्षा ऋतु का स्‍वभाव स्‍पष्‍ट हो जायेगा। इस वर्ष सिंह लग्‍न पर आर्द्रा नक्षत्र का प्रवेश हो रहा है, जबकि एकादश भाव पर सूर्य प्रवेश करेंगे। इस काल में गोचर पर चित्रा नक्षत्र पारिध योग, पैतिन कर्ण और चंद्रमा का भ्रमण कन्‍या राशि पर होगा। वर्षा कारक नक्षत्र और ग्रह आर्द्रा में भगवान भुवन भास्‍कर सूर्य 22 जून 2018 को प्रात काल 11 बज कर 23 मिनट पर प्रवेश करेंगे। इसी आधार पर देश में वर्षा के प्रभाव और स्‍वरूप का आंकलन किया जायेगा। ज्‍योतिष शास्‍त्र और अन्‍य शास्‍त्रों के अनुसार जैसे ही सूर्य आर्द्रा में प्रवेश करेंगे वर्षा ऋतु का स्‍वभाव स्‍पष्‍ट हो जायेगा। इस वर्ष सिंह लग्‍न पर आर्द्रा नक्षत्र का प्रवेश हो रहा है, जबकि एकादश भाव पर सूर्य प्रवेश करेंगे। इस काल में गोचर पर चित्रा नक्षत्र पारिध योग, पैतिन कर्ण और चंद्रमा का भ्रमण कन्‍या राशि पर होगा।   क्‍या है आर्दा नक्षत्र  आकाश मंडल में आर्द्रा नक्षत्र का स्‍थान छटवां है। यह राहू का नक्षत्र है जो मिथुन राशि में आता है। आर्द्रा नक्षत्र का स्वामी राहू माना जाता है और इसकी दशा 18 वर्ष की बताई गई है। हांलाकि मिथनु राशि पर ये 5 माह 12 दिन से 18 वर्ष तक होती है और चंद्र की स्थितिनुसार दशा जन्म के समय भोगना पड़ती है। इसके बाद गुरु की दशा लगती है, जो पूरे 16 वर्ष चलती है। जन्म नक्षत्र के अनुसार ही व्‍यक्‍ति को उस नक्षत्र के स्वामी का प्रभाव अपने जीवन पर दिखता है। आर्द्रा नक्षत्र व मिथुन राशि पर जन्मे लोगों को राहू व बुध के प्रभाव में जीवन भर रहना होता है और गुरु का भी महत्व देखने को मिलता है।    सूर्य का हुआ वृष राशि में प्रवेश ये होगा प्रभाव यह भी पढ़ें क्‍या होगा परिणाम   सूर्य के आर्दा में प्रवेश के बाद वर्षा का क्रम गड़बड़ा सकता है। इसलिए किसानों को मौसम को देख कर ही अपने काम करने उचित रहेंगे। खष्‍टेश और सप्‍तमेश शनि के पंचम भाव पर स्‍थित हैं इसलिए पश्‍चिमी मध्‍य प्रदेश और गुजरात के कुछ हिस्‍सों में वर्षा कम, दक्षिण भारत में केरल, पूर्वोत्‍तर भारत में बिहार, उड़ीसा, दिल्‍ली, बुंदेल खंड, और पश्‍चिमी भारत में पश्‍चिम बंगाल, आसाम, त्रिपुरा, कर्नाटक में वर्षा कुछ बेहतर पर सामान्‍य से कम रहेगी। साथ ही जून, जुलाई और अगस्‍त के महीनों में समय से वर्षा ना होने के कारण हानि की संभावना बढ़ सकती है। इसके बावजूद बाद के कुछ समय में वर्षा का असर सुधरने की संभावना है और कृषि के क्षेत्र में लाभ हो सकता है पर इसके लिए किसानों को सब व्‍यसनों को छोड़ अपने कर्म पर ध्‍यान देना होगा।

क्‍या है आर्दा नक्षत्र

आकाश मंडल में आर्द्रा नक्षत्र का स्‍थान छटवां है। यह राहू का नक्षत्र है जो मिथुन राशि में आता है। आर्द्रा नक्षत्र का स्वामी राहू माना जाता है और इसकी दशा 18 वर्ष की बताई गई है। हांलाकि मिथनु राशि पर ये 5 माह 12 दिन से 18 वर्ष तक होती है और चंद्र की स्थितिनुसार दशा जन्म के समय भोगना पड़ती है। इसके बाद गुरु की दशा लगती है, जो पूरे 16 वर्ष चलती है। जन्म नक्षत्र के अनुसार ही व्‍यक्‍ति को उस नक्षत्र के स्वामी का प्रभाव अपने जीवन पर दिखता है। आर्द्रा नक्षत्र व मिथुन राशि पर जन्मे लोगों को राहू व बुध के प्रभाव में जीवन भर रहना होता है और गुरु का भी महत्व देखने को मिलता है।

क्‍या होगा परिणाम 

सूर्य के आर्दा में प्रवेश के बाद वर्षा का क्रम गड़बड़ा सकता है। इसलिए किसानों को मौसम को देख कर ही अपने काम करने उचित रहेंगे। खष्‍टेश और सप्‍तमेश शनि के पंचम भाव पर स्‍थित हैं इसलिए पश्‍चिमी मध्‍य प्रदेश और गुजरात के कुछ हिस्‍सों में वर्षा कम, दक्षिण भारत में केरल, पूर्वोत्‍तर भारत में बिहार, उड़ीसा, दिल्‍ली, बुंदेल खंड, और पश्‍चिमी भारत में पश्‍चिम बंगाल, आसाम, त्रिपुरा, कर्नाटक में वर्षा कुछ बेहतर पर सामान्‍य से कम रहेगी। साथ ही जून, जुलाई और अगस्‍त के महीनों में समय से वर्षा ना होने के कारण हानि की संभावना बढ़ सकती है। इसके बावजूद बाद के कुछ समय में वर्षा का असर सुधरने की संभावना है और कृषि के क्षेत्र में लाभ हो सकता है पर इसके लिए किसानों को सब व्‍यसनों को छोड़ अपने कर्म पर ध्‍यान देना होगा।